प्रथम वन्दे गणपति -
गौरीसुत गननायक तुमको करें प्रणाम
एक तुम्हारे किरपा से पूरन हो शुभ काम
मन में भगति, तन में शक्ति, मुख में दो हरिनाम
दो ऐसा वर शम्भू-तनय, भली करें जो राम...
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आदरणीय पाठक बंधू आ बहिनी.
सावन के ए पावन महीना में, हम ए ब्लॉग के सुरुआत कर रहल बानी. रउवा लोग के आसिरबाद आ मार्गदर्सन के आवसकता पड़ी, त अपन वरद-हस्त हमरे माथा पर बनाएम.
आज एगो गनेस जी के बन्दना से सुरुआत करतानी -
सिव के अंगनवा में बरसे बदरिया रे
छम छम नाचे हो
मईया गिरिजा के ललनवा, से छम छम नाचे हो
तन लम्बोदर पे पाट पीताम्बर रे
छम छम नाचे हो
बबुआ गज के आननवा, से छम छम नाचे हो
बाजे मरिदंग, झाल, ढप, करतालावा रे
छम छम नाचे हो
संग मूसक वाहनवा, से छम छम नाचे हो
रंजन जे गावे सुनी संतजन नाचे ला रे
छम छम नाचे हो
बाबा सिव माई गौरा, से छम छम नाचे हो....

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